Friday, 6 March 2015

चाणक्य के १५ अमर वाक्य...

१ ) ➤ दूसरों की गलतियों से सीखो...
अपने ही ऊपर प्रयोग करके सीखने को तुम्हारी आयु कम पड़ेगी...।

२ ) ➤ किसी भी व्यक्ति को बहुत ईमानदार नहीं होना चाहिए...
सीधे वृक्ष और व्यक्ति ही पहले काटे जाते हैं...।

३ ) ➤ अगर कोई सर्प जहरीला नहीं है तब भी उसे जहरीला दिखना चाहिए...
वैसे दंश भले ही न दो पर दंश दे सकने की क्षमता का दूसरों को अहसास करवाते रहना चाहिए...।

४ ) ➤ हर मित्रता के पीछे कोई स्वार्थ जरूर होता है...
यह कड़वा सच है...।

५ ) ➤ कोई भी काम शुरू करने के पहले तीन सवाल अपने आपसे पूछो...
मैं ऐसा क्यों करने जा रहा हूँ ...?
इसका क्या परिणाम होगा...?
क्या मैं सफल रहूँगा...?

६ ) ➤ भय को नजदीक न आने दो...
अगर यह नजदीक आये इस पर हमला कर दो...
यानी भय से भागो मत इसका सामना करो...

७ ) ➤ दुनिया की सबसे बड़ी ताकत पुरुष का विवेक और महिला की सुन्दरता है...

८ ) ➤ काम का निष्पादन करो...
परिणाम से मत डरो...

९ ) ➤ सुगंध का प्रसार हवा के रुख का मोहताज़ होता है...
पर अच्छाई सभी दिशाओं में फैलती है...

१० ) ➤ ईश्वर चित्र में नहीं चरित्र में बसता है...
अपनी आत्मा को मंदिर बनाओ...

११ ) ➤ व्यक्ति अपने आचरण से महान होता है जन्म से नहीं...

१२ ) ➤ ऐसे व्यक्ति जो आपके स्तर से ऊपर या नीचे के हैं उन्हें दोस्त न बनाओ...
वह तुम्हारे कष्ट का कारण बनेगे...
समान स्तर के मित्र ही सुखदायक होते हैं...

१३ ) ➤ अपने बच्चों को पहले पांच साल तक खूब प्यार करो...
छः साल से पंद्रह साल तक कठोर अनुशासन और संस्कार दो...
सोलह साल से उनके साथ मित्रवत व्यवहार करो...
आपकी संतति ही आपकी सबसे अच्छी मित्र है...

१४ ) ➤ अज्ञानी के लिए किताबें और अंधे के लिए दर्पण एक समान उपयोगी है...

१५ ) ➤ शिक्षा सबसे अच्छी मित्र है। शिक्षित व्यक्ति सदैव सम्मान पाता है। शिक्षा की शक्ति के आगे युवा शक्ति और सौंदर्य
दोनों ही कमजोर है।

रंगता कौन वसंत?

कौन रंग फागुन रंगे, रंगता कौन वसंत?
प्रेम रंग फागुन रंगे, प्रीत कुसुंभ वसंत।
चूड़ी भरी कलाइयाँ, खनके बाजू-बंद,
फागुन लिखे कपोल पर, रस से भीगे छंद।
फीके सारे पड़ गए, पिचकारी के रंग,
अंग-अंग फागुन रचा, साँसें हुई मृदंग।
धूप हँसी बदली हँसी, हँसी पलाशी शाम,
पहन मूँगिया कंठियाँ, टेसू हँसा ललाम।
कभी इत्र रूमाल दे, कभी फूल दे हाथ,
फागुन बरज़ोरी करे, करे चिरौरी साथ।
नखरीली सरसों हँसी, सुन अलसी की बात,
बूढ़ा पीपल खाँसता, आधी-आधी रात।
बरसाने की गूज़री, नंद-गाँव के ग्वाल,
दोनों के मन बो गया, फागुन कई सवाल।
इधर कशमकश प्रेम की, उधर प्रीत मगरूर,
जो भीगे वह जानता, फागुन के दस्तूर।
पृथ्वी, मौसम, वनस्पति, भौरे, तितली, धूप,
सब पर जादू कर गई, ये फागुन की धूल

Tuesday, 3 March 2015

राधा - क्रिष्न

अति सुंदर कविता
एक बार जरुर पूरी पढ़े

स्वर्ग में विचरण
करते हुए
अचानक एक दुसरे के
सामने आ गए

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विचलित से
कृष्ण ,

प्रसन्नचित सी
राधा...

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कृष्ण सकपकाए,
राधा मुस्काई

इससे पहले कृष्ण
कुछ कहते
राधा बोल उठी
"कैसे हो द्वारकाधीश ?"

जो राधा उन्हें
कान्हा कान्हा
कह के बुलाती थी

उसके मुख से
द्वारकाधीश का
संबोधन
कृष्ण को
भीतर तक
घायल
कर गया
फिर भी किसी तरह
अपने आप को
संभाल लिया

.....और बोले राधा से
मै तो तुम्हारे लिए
आज भी कान्हा हूँ
तुम तो द्वारकाधीश
मत कहो!

आओ बैठते है ....
कुछ मै अपनी कहता हूँ
कुछ तुम अपनी कहो

सच कहूँ राधा
जब जब भी
तुम्हारी याद
आती थी
इन आँखों से
आँसुओं की बुँदे
निकल आती थी

बोली राधा ,मेरे साथ
ऐसा कुछ नहीं हुआ
ना तुम्हारी याद आई
ना कोई आंसू बहा

क्यूंकि हम तुम्हे
कभी भूले ही कहाँ थे
जो तुम याद आते

इन आँखों में सदा
तुम रहते थे
कहीं आँसुओं के
साथ निकल
ना जाओ
इसलिए रोते भी
नहीं थे

प्रेम के अलग होने पर
तुमने क्या खोया
इसका इक आइना
दिखाऊं आपको ?

कुछ कडवे सच ,
प्रश्न सुन पाओ तो
सुनाऊ?

कभी सोचा इस
तरक्की में तुम
कितने पिछड़ गए

यमुना के मीठे पानी
से जिंदगी शुरू की
और समुन्द्र के
खारे पानी तक
पहुच गए ?

एक ऊँगली पर
चलने वाले
सुदर्शन चक्र
पर भरोसा कर लिया
और दसों उँगलियों
पर चलने वाळी
बांसुरी को
भूल गए ?

कान्हा जब तुम
प्रेम से जुड़े थे तो ....
जो ऊँगली
गोवर्धन पर्वत
उठाकर लोगों को
विनाश से बचाती थी

प्रेम से अलग होने
पर वही ऊँगली
क्या क्या रंग
दिखाने लगी
सुदर्शन चक्र
उठाकर विनाश के
काम आने लगी

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कान्हा और
द्वारकाधीश में
क्या फर्क होता है
बताऊँ
कान्हा होते तो
तुम सुदामा के
घर जाते
सुदामा तुम्हारे घर
नहीं आता

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युद्ध में और प्रेम
में यही तो फर्क
होता है

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युद्ध में आप मिटाकर
जीतते हैं

और प्रेम में आप मिटकर
जीतते हैं

कान्हा प्रेम में
डूबा हुआ आदमी
दुखी तो रह सकता है
पर किसी को
दुःख नहीं देता

आप तो कई
कलाओं के स्वामी हो
स्वप्न दूर द्रष्टा हो
गीता जैसे ग्रन्थ
के दाता हो

पर आपने
क्या निर्णय किया
अपनी पूरी सेना
कौरवों को सौंप दी?
और अपने आपको
पांडवों के
साथ कर लिया

सेना तो आपकी
प्रजा थी
राजा तो पालक होता है
उसका रक्षक होता है

आप जैसा महा ज्ञानी
उस रथ को
चला रहा था
जिस पर बैठा
अर्जुन
आपकी प्रजा को ही
मार रहा था

आपनी प्रजा को
मरते देख
आपमें करूणा
नहीं जगी

क्यूंकि आप
प्रेम से शून्य
हो चुके थे

आज भी धरती
पर जाकर देखो
अपनी
द्वारकाधीश
वाळी छवि को

ढूंढते रह जाओगे

हर घर हर मंदिर में
मेरे साथ ही
खड़े नजर आओगे
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आज भी मै मानती हूँ
लोग गीता के ज्ञान
की बात करते हैं
उनके महत्व की
बात करते है

मगर धरती के लोग
युद्ध वाले
द्वारकाधीश.
पर नहीं
प्रेम वाले कान्हा
पर भरोसा करते हैं

गीता में मेरा
दूर दूर तक नाम
भी नहीं है
पर आज भी लोग
उसके समापन पर

" राधे राधे" करते है

अंतिम यात्रा

...
किसी शायर ने अंतिम यात्रा
का क्या खूब वर्णन किया है.....
   
था मैं नींद में और. 
मुझे इतना
सजाया जा रहा था....

बड़े प्यार से
मुझे नहलाया जा रहा
था....

ना जाने
था वो कौन सा अजब खेल
मेरे घर
में....

बच्चो की तरह मुझे
कंधे पर उठाया जा रहा
था....

था पास मेरा हर अपना
उस
वक़्त....

फिर भी मैं हर किसी के
मन
से
भुलाया जा रहा था...

जो कभी देखते
भी न थे मोहब्बत की
निगाहों
से....

उनके दिल से भी प्यार मुझ
पर
लुटाया जा रहा था...

मालूम नही क्यों
हैरान था हर कोई मुझे
सोते
हुए
देख कर....

जोर-जोर से रोकर मुझे
जगाया जा रहा था...

काँप उठी
मेरी रूह वो मंज़र
देख
कर....
.
जहाँ मुझे हमेशा के
लिए
सुलाया जा रहा था....
.
मोहब्बत की
इन्तहा थी जिन दिलों में
मेरे
लिए....
.
उन्हीं दिलों के हाथों,
आज मैं जलाया जा रहा था!!!

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    �� लाजवाब लाईनें��
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Wednesday, 7 January 2015

गोलगप्पा??

बीती शाम दिल्ली के कनाट प्लेस मे एक
बहुत ही अनोखी घटना हुई!!!
एक लड़की ने बिना कुछ बोले,, चुपचाप
बिना नमक-मिर्ची कम
या ज्यादा की शिकायत कियेे
गोलगप्पा खा लिया, और तो और गोलगप्पे वाले
को भईया तक
नही बोला||
जब घटना घट रही थी तो कई
दिल्ली वाले ईस के गवाह बने और उन्होने
जम कर उस लड़की की तारीफ की||कुछ
लड़कों ने तो उसे गुलदस्ते भी भेंट किये|| ईधर नन्दु
गोलगप्पे वाले
ने कहा- "जब
वो गोलगप्पा खाने आयी तो मुझे
लगा बाकियों की तरह
वो भी "भईया तीखा कम है, भईया मिर्च
और डालो, भईया ये क्या हमे उल्लु
बना रहे हो " जैसे सवालों से परेशान कर देगी, पर जब
उसने कुछ
ना बोला तो मै
तो बेहोश हो गया था पर जब लोगो ने
मुझे पानी मार कर उठाया तब मैने उस
देवी के चरण धर लिए...!!
ऐसी अच्छी लड़की मैने आज तक
नही देखी ..!! वहीं ईस घटना पर राज्य
की महिला आयोग ने आपत्ति जताते हुए
कहा है कि ये महिलाओं का हक है
गोलगप्पे वाले भईया को कुछ ना कुछ
बोलना, अगर वो चुप रही तो ये हमारे
लिए गलत होगा, हमे महिलाओं के हक मे आवाज़
उठानी पड़ेगी||
ईस घटना के बाद कनाट प्लेस के सारे
गोलगप्पे वालों ने उस लड़की के खाने के
लिए गोलगप्पे जिन्दगी भर फ्री मे देने
की घोषणा की है|| कई लड़के जो ईस
घटना के चश्मदीद गवाह बने, उनमे से कईयों ने उस
लड़की को शादी के लिए
प्रपोज़ कर दिया|
उनका कहना था कि ऐसे चुप रहने
वाली बीवी कहाँ मिलेगी!! ईससे
उनका पुरा गृहस्थ जीवन सुखमय तरीके से
बीत सकता है|| .
जैसे
ही प्रधानमन्त्री को पता चला उन्होने
तुरन्त एक प्रेस काँफ्रेस बुलाकर उस
लड़की की तारिफ की||
दिल्ली के व्यापारिक मन्डल ने हर खरीददारी पर उस
लड़की को 80% छुट
देने की घोषणा कर दी है|| लड़की के
मा बाप अभी परेशान हैं आने वाले
रिस्तो के लेकर, वो तो यहाँ तक कह रहे हैं
कि बड़े बड़े IAS से लेकर मन्त्री के घर से
रिस्ते आ रहे हैं|| नन्दु गोलगप्पे वाले ने तो खुद होश मे
आते
ही शादी का प्रस्ताव दे मारा था||
लड़की के घर के बाहर कई लोग जमा होकर
एक-दुसरे को मिठाई खिलाते हुए जश्न
मना रहे थे||
. केजरीवाल ने ईसपर टीप्पणी करते हुए
कहा कि "जी हम व्यवस्था परिवर्तन करने
आये थे पर ऐसे होगा, ईससे मै खुद भी हैरान
हुँ"...?
वहीं पुरुष समाज ने जहाँ ईस घटना पर
खुशी जतायी है !! वहीं महिला समाज मे गज़ब
का गुस्सा देखा जा रहा है|| देश के
महिला आयोग ने लड़की के घर के बाहर
धरना देने की बात की है जिसे
केजरीवाल सहित सरकार ने भी समर्थन
देने से ईनकार किया है और कुछ लोगो ने स्वच्छ
अभियान
की तर्ज पर
"महिला गोलगप्पा चुपचाप" योजना के
शुरुआत की भी माँग की है ??
लड़की को जहाँ देशभर के
युवा लड़कों का सोसल साईटस पर
भारी समर्थन मिल रहा है ,वहीं लड़कियों ने मिलकर
उस
लड़की के फेसबुक पेज पर जम कर 'स्पैम' मारे
है और ब्लाक करने की कोशिश की पर
ब्लाक नही कर पाये, कारण
बताया जा रहा है कि मार्क जकरबर्ग ने
भी उस लड़की से शादी का प्रस्ताव रखा है और
वो उस
लड़की के पेज़
की जिम्मेदारी खुद उठाये हुए हैं|| अन्तिम खबर मिलने
तक
पश्चिम विहार मे
रहने वाले ईस लड़की के घर के बाहर
भारी मात्रा मे पुलिस बल को तैनात कर
दिय गया है...???

Thursday, 11 December 2014

दोस्त कुछ चीजें ऐसी भी हैं जो सालो से नहीं की....

   एक अखरोट आपको कितना आनंद दे सकता है! कल मैं ने बहुत सारे साल बाद दाँत से तोड़कर अखरोट खाए और बचपन के दिनों में खो गया| दाँत से अखरोट तोड़ते समय विको वज्रदंती की एड याद आ गयी| गौरी व्रत के दिन याद आए, और बाद मे स्कूल जाते समय मम्मी शर्ट की जेब मे काजू द्राक्ष और बादाम भर देती थी वह याद आया|
   आपको यह पूरी बात बेकार लगे लेकिन असली बात ये है दोस्त कि कुछ चीजें ऐसी होती हैं जो आपने वर्षो से नहीं की| जैसे कि मैंने दाँतो से १५ साल पहले अखरोट तोड़कर छिला था, उसके बाद अब कल छिला तो मजा आ गया| इसी प्रकार हमारे जीवन मे भी छूटी हुई कई घटनाएँ होंगी| ऐसा क्या था जो सालो पहले किया था?? शायद कोई योगासन हो सकता है या फिर सूर्योदय देखने की तक हो सकती है| वाईफ के लिए सुबह की पहली चाय बनाने की इच्छा हो सकती है या वर्षो पहले आपका गाया हुआ कोई गीत हो सकता है| आज वो छूटा हुआ गीत फिर गीते हैं| सनराईज़ देखे हुए बहुत समय हो गया हो तो आज समय निकाल कर सूर्योदय के साक्षी बनो| पार्क मे झूला झूले कई साल बीत गये हो तो आज झूलो यार!
   बाय ध वे
   आज दिन की शुरूआत मे ऐसा करो कि आपका दिल आपको कहे कि वाह! आज मूड (mood) मे है ना दोस्त!!

Sunday, 7 December 2014

हिन्दुत्व की जानकारी

अधूरा ज्ञान खतरनाक होता है।
33 करोड नहीँ 33 कोटि देवी देवता हैँ हिँदू
धर्म मेँ। कोटि = प्रकार। देवभाषा संस्कृत में
कोटि के दो अर्थ होते है, कोटि का मतलब
प्रकार होता है और एक अर्थ करोड़
भी होता। हिन्दू धर्म का दुष्प्रचार करने के
लिए ये बात उडाई गयी की हिन्दुओ के 33
करोड़ देवी देवता हैं और अब तो मुर्ख हिन्दू
खुद ही गाते फिरते हैं की हमारे 33 करोड़
देवी देवता हैं........
कुल 33 प्रकार के देवी देवता हैँ हिँदू धर्म मेँ:
12 प्रकार हैँ आदित्य: , धाता, मित, आर्यमा,
शक्रा, वरुण, अँश, भाग, विवास्वान, पूष,
सविता, तवास्था, और विष्णु...! 8 प्रकार हैँ
वासु:, धर, ध्रुव, सोम, अह, अनिल, अनल, प्रत्युष
और प्रभाष। 11 प्रकार हैँ- रुद्र: ,हर,
बहुरुप,त्रयँबक,
अपराजिता, बृषाकापि, शँभू, कपार्दी,
रेवात, मृगव्याध, शर्वा, और कपाली। एवँ
दो प्रकार हैँ अश्विनी और कुमार।
कुल: 12+8+11+2=33
अगर कभी भगवान् के आगे हाथ जोड़ा है
तो इस जानकारी को अधिक से अधिक
लोगो तक पहुचाएं। ।