महाभारत का युद्ध चल रहा था।
अर्जुन के सारथी श्रीकृष्ण थे।
जैसे ही अर्जुन का बाण छूटता,
कर्ण का रथ दूर तक पीछे चला जाता।
जब कर्ण का बाण छूटता,
तो अर्जुन का रथ सात कदम पीछे चला जाता।
श्रीकृष्ण ने अर्जुन की प्रशंसा के स्थान पर
कर्ण के लिए हर बार कहा...
कितना वीर है यह कर्ण?
जो उनके रथ को सात कदम पीछे धकेल देता है।
अर्जुन बड़े परेशान हुए।
असमंजस की स्थिति में पूछ बैठे...
हे वासुदेव! यह पक्षपात क्यों?
मेरे पराक्रम की आप प्रशंसा नहीं करते...
एवं मात्र सात कदम पीछे धकेल देने वाले कर्ण को
बारम्बार वाहवाही देते है।
श्रीकृष्ण बोले-अर्जुन तुम जानते नहीं...
तुम्हारे रथ में महावीर हनुमान...
एवं स्वयं मैं वासुदेव कृष्ण विराजमान् हैं।
यदि हम दोनों न होते...
तो तुम्हारे रथ का अभी अस्तित्व भी नहीं होता।
इस रथ को सात कदम भी पीछे हटा देना कर्ण के
महाबली होने का परिचायक हैं।
अर्जुन को यह सुनकर अपनी क्षुद्रता पर ग्लानि हुई।
इस तथ्य को अर्जुन और भी अच्छी तरह तब समझ पाए
जब युद्ध समाप्त हुआ।
प्रत्येक दिन अर्जुन जब युद्ध से लौटते...
श्रीकृष्ण पहले उतरते,
फिर सारथी धर्म के नाते अर्जुन को उतारते।
अंतिम दिन वे बोले-अर्जुन...
तुम पहले उतरो रथ से व थोड़ी दूर जाओ।
भगवान के उतरते ही रथ भस्म हो गया।
अर्जुन आश्चर्यचकित थे।
भगवान बोले-पार्थ...
तुम्हारा रथ तो कब का भस्म हो चुका था।
भीष्म,
कृपाचार्य,
द्रोणाचार्य
व
कर्ण के
दिव्यास्त्रों से यह नष्ट हो चुका था।
मेरे संकल्प ने इसे युद्ध समापन तक जीवित रखा था।
अपनी श्रेष्ठता के मद में चूर अर्जुन का अभिमान चूर-
चूर हो गया था।
अपना सर्वस्व त्यागकर वे प्रभू के चरणों पर नतमस्तक
हो गए।
अभिमान का व्यर्थ बोझ उतारकर हल्का महसूस कर
रहे थे...
गीता श्रवण के बाद इससे बढ़कर और क्या उपदेश हो
सकता था कि सब भगवान का किया हुआ है।
हम तो निमित्त मात्र है।
काश हमारे अंदर का अर्जुन इसे समझ पायें।
घमंड जीवनमें कष्ट ही देता है। ........
अहंकार छोडो लेकीन स्वाभिमान के लिये लडते रहो |
हरे कृष्णा |
Monday, 7 September 2015
भगवान कृष्ण अर्जुन संवाद
Thursday, 13 August 2015
Babuji, Apki Chai And I Was Surprised
I had just reached the railway station and was
waiting for my train to arrive as I had to travel to
Jaipur in a family function of my friend. When I
asked the Train Enquiry Department, they told me
that the train will arrive at 9.00 pm, which meant
I had to wait for an extra hour. So I tried to pass
my time by having a look at the station and the
things happening there.
Since it was a small station, there were very few
passengers. I saw a group of boys playing with
the pebbles. The boys were all dressed up quite
pathetically as their clothes were very dirty and
torn. But still they were quite happy with the
pebbles and were enjoying to the fullest.
Suddenly I developed an urge to drink tea as it
was a cold evening,but to my misfortune, I
couldn’t find any tea vendors on the very station.
The only tea vendor was sitting outside the
station and I couldn’t take the risk of leaving all
my luggage on the station just to drink the tea. I
called one of the boys from the guys and asked
him to bring me a cup of tea by handing him a
coin of 5 rupees. He agreed and went to bring me
the tea.
Time passed and after half an hour,I heard the
announcement which said that my train would be
arriving in a couple of minutes. Now I was sure
that the child ran away with the money and
cursed myself for trusting a ROADSIDE Boy. I
stood up to pick my luggage as the train arrived.
I was just about to enter the coach when I heard
a voice which said ‘Babuji, Apki chai’ (translates
to ‘Sir, your tea’)
Surprised with the voice, I looked back and asked
him,Why did he bring the tea so late?
He told me, he lost the 5 rupees coin and so he
had to clean the utensils of the tea vendor, to
bring me a cup of tea!!
– Saurabh Srivastava (on Quora)
(Representational Image)
Friday, 7 August 2015
चुटकुला तो नही है पर यह पढने के बाद एक प्यारी सी स्माइल जरूर आएगी.....
1) कितना मुश्किल है, जिंदगी का सफर..., भगवान मरने नही देते और इंसान जीने नही देते।
2) खून जिसका भी हो रंग सबका एक ही है, कैसे पता लगाया जाये बेगाना कौन है और अपना कौन है।
3) चलो माना दुनियाँ बहुत बुरी है, लेकिन तुम तो अच्छे बनो तुम्हे किसने रोका है....!!
4) जो जैसा है, उसे वैसा ही अपना लो…!! रिश्ते निभाने आसान हो जायेंगे..,
5) “दुआ” कभी खाली नही जाती… बस लोग ईन्तजार नही करते..!!
6 ) हे स्वार्थ तेरा शुक्रिया... एक तू ही है , जिसने लोगो को आपस में जोड़ कर रख रखा है.
7) वक़्त की मार तो देख... दुनिया जीतने वाले सिकंदर का देश ... दिवालिया हो गया....
8) ''' गिरना भी अच्छा है,औकात का पता चलता है ,, ''' बढ़ते हैं जब हाथ उठाने को, अपनों का पता चलता है ,,
9) बहुत देखा जीवन में समझदार बन कर, पर ख़ुशी हमेशा पागल बनने पर ही मिलती है...!!!
10) गलती जिंदगी का एक पन्ना है; परन्तु 'रिश्ते' पूरी किताब हैं। ज़रूरत पड़ने पर 'गलती' का पन्ना फाड़ देना लेकिन एक पन्ने के लिए पूरी किताब मत फाड़ देना
11) जिन्दगी के सफर से, बस इतना ही सबक सीखा है । सहारा कोई कोई ही देता है, धक्का देने को हर शख्स तैयार बैठा है...!!
12) इंसान को उस जगह हमेशा 'खामोश' रहना चाहिये - जहां . . . 'दो कौड़ी' के लोग अपनी 'हैसियत' के गुण गाते हों.....
13) धर्म से कर्म इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि धर्म करके भगवान से मांगना पडता है, जब कि कर्म करने से भगवान को खुद ही देना पडता है॥
14) कोई भी ईन्सान इतना अमीर नही होता की वो अपना भुतकाल खरीद सके ... और... कोई इतना गरीब नही होता की वो अपना भविष्यन बदल सके.
15) इंसान को अपनी औकात भूलने की बीमारी है और कुदरत के पास उसे याद दिलाने की अचूक दवा...
16) छोटे छोटे कदम मीलों का सफर तय कर सकते हैं।
17) ‘सब्र’ और ‘सच्चाई’ एक ऐसी सवारी है…..जो अपने सवार को कभी गिरने नहीं देती….. ना किसी के कदमो में…और ना किसीकी नज़रों में..!!
18) अच्छे के साथ अच्छे रहे...लेकिन बुरे के साथ बुरे नहीं बने... "क्योंकि" पानी से खून साफ कर सकते है लेकिन खून से खून नही....
Sunday, 5 July 2015
खूबसूरत शायरी में गीता सार
यह जिस्म तो किराये का घर है;
एक दिन खाली करना पड़ेगा:!!
सांसे हो जाएँगी जब हमारी पूरी यहाँ;
रूह को तन से अलविदा कहना पड़ेगा:!!
वक्त नही है तो बच जायेगा गोली से भी;
समय आने पर ठोकर से मरना पड़ेगा:!!
मौत कोई रिश्वत लेती नही कभी;
सारी दौलत को छोंड़ के जाना पड़ेगा:!!
ना डर यूँ धूल के जरा से एहसास से तू;
एक दिन सबको मिट्टी में मिलना पड़ेगा:!!
सब याद करे दुनिया से जाने के बाद;
दूसरों के लिए भी थोडा जीना पड़ेगा:!!
मत कर गुरुर किसी भी बात का ए दोस्त:!
तेरा क्या है..? क्या साथ लेके जाना पड़ेगा...!!
इन हाथो से करोड़ो कमा ले भले तू यहाँ...
खाली हाथ आया खाली हाथ जाना पड़ेगा:!!
ना भर यूँ जेबें अपनी बेईमानी की दौलत से...
कफ़न को बगैर जेब के ही ओढ़ना पड़ेगा..!!
यह ना सोच तेरे बगैर कुछ नहीं होगा यहाँ;
रोज़ यहाँ किसी को 'आना' तो किसी को 'जाना' पड़ेगा..
Saturday, 4 July 2015
कृष्ण अर्जुन संवाद - भक्ति, मौज व मृत्यु
एक बार अर्जुन श्री कृष्णजी से बोले :-
केशव ,जब मृत्यु सभी की
होनी है तो हम सत्संग भजन सेवा सिमरन क्यों करे
जो इंसान मौज मस्ती करता है मृत्यु तो
उसकी भी होगी ।
श्री कृष्णजी ने अर्जुन से कहा :- हे
पार्थ
बिल्ली जब चूहे को पकड़ती है तो दांतो
से पकड़कर उसे मार कर खा जाती है । लेकिन
उन्ही दांतो से जब अपने बच्चे को
पकड़ती है तो उसे मारती
नहीं बहुत ही नाजुक
तरीके से एक जगह से दूसरी जगह
पंहुचा देती है । दांत भी
वही है मुह भी वही है
पर परिणाम अलग अलग । ठीक उसी
प्रकार मृत्यु भी सभी की
होगी पर एक प्रभु के धाम में और दूसरा 84 के
चक्कर में बोलो हरे कृष्णा
Saturday, 9 May 2015
महावीर महाराणा प्रताप जी
नाम - कुँवर प्रताप जी (श्री महाराणा प्रताप सिंह जी)
जन्म - 9 मई, 1540 ई.
जन्म भूमि - कुम्भलगढ़, राजस्थान
पुण्य तिथि - 29 जनवरी, 1597 ई.
पिता - श्री महाराणा उदयसिंह जी
माता - राणी जीवत कँवर जी
राज्य - मेवाड़
शासन काल - 1568–1597ई.
शासन अवधि - 29 वर्ष
वंश - सुर्यवंश
राजवंश - सिसोदिया
राजघराना - राजपूताना
धार्मिक मान्यता - हिंदू धर्म
युद्ध - हल्दीघाटी का युद्ध
राजधानी - उदयपुर
पूर्वाधिकारी - महाराणा उदयसिंह
उत्तराधिकारी - राणा अमर सिंह
अन्य जानकारी -
महाराणा प्रताप सिंह जी के पास एक सबसे प्रिय घोड़ा था,
जिसका नाम 'चेतक' था।
राजपूत शिरोमणि महाराणा प्रतापसिंह उदयपुर,
मेवाड़ में सिसोदिया राजवंश के राजा थे।
वह तिथि धन्य है, जब मेवाड़ की शौर्य-भूमि पर मेवाड़-मुकुटमणि
राणा प्रताप का जन्म हुआ।
महाराणा का नाम
इतिहास में वीरता और दृढ़ प्रण के लिये अमर है।
महाराणा प्रताप की जयंती विक्रमी सम्वत् कॅलण्डर
के अनुसार प्रतिवर्ष ज्येष्ठ, शुक्ल पक्ष तृतीया को मनाई जाती
है।
महाराणा प्रताप के बारे में कुछ रोचक जानकारी:-
1... महाराणा प्रताप एक ही झटके में घोड़े समेत दुश्मन सैनिक को काट डालते थे।
2.... जब इब्राहिम लिंकन भारत दौरे पर आ रहे थे तब उन्होने
अपनी माँ से पूछा कि हिंदुस्तान से आपके लिए क्या लेकर
आए| तब माँ का जवाब मिला- ”उस महान देश की वीर भूमि
हल्दी घाटी से एक मुट्ठी धूल लेकर आना जहाँ का राजा अपनी प्रजा के प्रति इतना वफ़ादार था कि उसने आधे हिंदुस्तान के बदले अपनी मातृभूमि को चुना ” लेकिन बदकिस्मती से उनका वो दौरा रद्द हो गया था | “बुक ऑफ़
प्रेसिडेंट यु एस ए ‘किताब में आप यह बात पढ़ सकते हैं |
3.... महाराणा प्रताप के भाले का वजन 80 किलोग्राम था और कवच का वजन भी 80 किलोग्राम ही था|
कवच, भाला, ढाल, और हाथ में तलवार का वजन मिलाएं तो कुल वजन 207 किलो था।
4.... आज भी महाराणा प्रताप की तलवार कवच आदि सामान
उदयपुर राज घराने के संग्रहालय में सुरक्षित हैं |
5.... अकबर ने कहा था कि अगर राणा प्रताप मेरे सामने झुकते है तो आधा हिंदुस्तान के वारिस वो होंगे पर बादशाहत अकबर की ही रहेगी|
लेकिन महाराणा प्रताप ने किसी की भी अधीनता स्वीकार करने से मना कर दिया |
6.... हल्दी घाटी की लड़ाई में मेवाड़ से 20000 सैनिक थे और
अकबर की ओर से 85000 सैनिक युद्ध में सम्मिलित हुए |
7.... महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक का मंदिर भी बना हुआ है जो आज भी हल्दी घाटी में सुरक्षित है |
8.... महाराणा प्रताप ने जब महलों का त्याग किया तब उनके साथ लुहार जाति के हजारो लोगों ने भी घर छोड़ा और दिन रात राणा कि फौज के लिए तलवारें बनाईं| इसी
समाज को आज गुजरात मध्यप्रदेश और राजस्थान में गाढ़िया लोहार कहा जाता है|
मैं नमन करता हूँ ऐसे लोगो को |
9.... हल्दी घाटी के युद्ध के 300 साल बाद भी वहाँ जमीनों में तलवारें पाई गई।
आखिरी बार तलवारों का जखीरा 1985 में हल्दी घाटी में मिला था |
10..... महाराणा प्रताप को शस्त्रास्त्र की शिक्षा "श्री जैमल मेड़तिया जी" ने दी थी जो 8000 राजपूत वीरों को लेकर 60000 मुसलमानों से लड़े थे। उस युद्ध में 48000 मारे गए थे
जिनमे 8000 राजपूत और 40000 मुग़ल थे |
11.... महाराणा के देहांत पर अकबर भी रो पड़ा था |
12.... मेवाड़ के आदिवासी भील समाज ने हल्दी घाटी में
अकबर की फौज को अपने तीरो से रौंद डाला था वो महाराणा प्रताप को अपना बेटा मानते थे और राणा बिना भेदभाव के उन के साथ रहते थे|
आज भी मेवाड़ के राजचिन्ह पर एक तरफ राजपूत हैं तो दूसरी तरफ भील |
13..... महाराणा प्रताप का घोड़ा चेतक महाराणा को 26 फीट का दरिया पार करने के बाद वीर गति को प्राप्त हुआ | उसकी एक टांग टूटने के बाद भी वह दरिया पार कर गया। जहाँ वो घायल हुआ वहां आज खोड़ी इमली नाम का पेड़ है जहाँ पर चेतक की मृत्यु हुई वहाँ चेतक मंदिर है |
14..... राणा का घोड़ा चेतक भी बहुत ताकतवर था उसके
मुँह के आगे दुश्मन के हाथियों को भ्रमित करने के लिए हाथी
की सूंड लगाई जाती थी । यह हेतक और चेतक नाम के दो घोड़े थे|
15..... मरने से पहले महाराणा प्रताप ने अपना खोया
हुआ 85 % मेवाड फिर से जीत लिया था । सोने चांदी और
महलो को छोड़कर वो 20 साल मेवाड़ के जंगलो में घूमे |
16.... महाराणा प्रताप का वजन 110 किलो और लम्बाई 7’5” थी, दो म्यान वाली तलवार और 80 किलो का भाला रखते थे हाथ में।
महाराणा प्रताप के हाथी
की कहानी:
मित्रो आप सब ने महाराणा
प्रताप के घोड़े चेतक के बारे
में तो सुना ही होगा,
लेकिन उनका एक हाथी
भी था। जिसका नाम था रामप्रसाद। उसके बारे में आपको कुछ बाते बताता हुँ।
रामप्रसाद हाथी का उल्लेख
अल- बदायुनी, जो मुगलों
की ओर से हल्दीघाटी के
युद्ध में लड़ा था ने अपने एक ग्रन्थ में किया है।
वो लिखता है की जब महाराणा
प्रताप पर अकबर ने चढाई की
थी तब उसने दो चीजो को
ही बंदी बनाने की मांग की
थी एक तो खुद महाराणा
और दूसरा उनका हाथी
रामप्रसाद।
आगे अल बदायुनी लिखता है
की वो हाथी इतना समझदार
व ताकतवर था की उसने
हल्दीघाटी के युद्ध में अकेले ही
अकबर के 13 हाथियों को मार
गिराया था
वो आगे लिखता है कि
उस हाथी को पकड़ने के लिए
हमने 7 बड़े हाथियों का एक
चक्रव्यूह बनाया और उन पर
14 महावतो को बिठाया तब
कहीं जाकर उसे बंदी बना पाये।
अब सुनिए एक भारतीय
जानवर की स्वामी भक्ति।
उस हाथी को अकबर के समक्ष
पेश किया गया जहा अकबर ने
उसका नाम पीरप्रसाद रखा।
रामप्रसाद को मुगलों ने गन्ने
और पानी दिया।
पर उस स्वामिभक्त हाथी ने
18 दिन तक मुगलों का न
तो दाना खाया और न ही
पानी पिया और वो शहीद
हो गया।
तब अकबर ने कहा था कि
जिसके हाथी को मैं अपने सामने
नहीं झुका पाया उस महाराणा
प्रताप को क्या झुका पाउँगा।
ऐसे ऐसे देशभक्त चेतक व रामप्रसाद जैसे तो यहाँ
जानवर थे।
इसलिए मित्रो हमेशा अपने
भारतीय होने पे गर्व करो।
पढ़कर सीना चौड़ा हुआ हो
तो शेयर कर देना।
Thursday, 2 April 2015
Some Important questions
These are few questions asked in HR interview... The answers are really stunning and inspiring........ Thinking out of the box...! A must READ......
Question 1:
You are driving along in your car on a wild, stormy night, it's raining heavily, when suddenly you pass by a bus stop, and you see three people waiting for a bus:
* An old lady who looks as if she is about to die.
* An old friend who once saved your life.
* The perfect partner you have been dreaming about.
Which one would you choose to offer a ride to, knowing very well that there could only be one passenger in your car?
This is a moral/ethical dilemma that was once actually used as part of a job application.
He simply answered:
"I would give the car keys to my Old friend and let him take the lady to the hospital. I would stay behind and wait for the bus with the partner of my dreams."
Sometimes, we gain more if we are able to give up our stubborn thought limitations. Never forget to "Think Outside of the Box."
Question 2:
What will you do if I run away with your sister?
The candidate who was selected answered " I will not get a better match for my sister than you sir"
Question 3:
Interviewer (to a student girl candidate) What if one morning you woke up & found that you were pregnant.
Girl I will be very excited and take an off, to celebrate with my husband.
Normally an unmarried girl will be shocked to hear this, but she managed it well. Why I should think it in the wrong way, she said later when asked.
Question 4:
Interviewer: He ordered a cup of coffee for the candidate. Coffee arrived kept before the candidate, then he asked what is before you?
Candidate: Instantly replied "Tea"
He got selected.
You know how and why did he say "TEA" when he knows very well that coffee was kept before.
(Answer: The question was "What is before you (U alphabet) Reply was "TEA" ( T alphabet)
Alphabet "T" was before Alphabet "U"
Question5;
Interviewer said "I shall either ask you ten easy questions or one really difficult question.
Think well before you make up your mind!" The boy thought for a while and said, "my choice is one really difficult question."
"Well, good luck to you, you have made your own choice! Now tell me this. "What comes first, Day or Night?"
The boy was jolted into reality as his admission bb on the correctness of his answer, but he thought for a while and said, "It's the DAY sir!"
"How" the interviewer asked,
"Sorry sir, you promised me that you will not ask me a SECOND difficult question!"
___
Sometimes just thinking out of the box is all it takes!
Share with your friend and give them a special moment of thinking...!!
Very beautiful lines
Try to Understand People before Trusting them......B'coz we are living in such a world, Where Artificial Lemon flavor is used for "Welcome Drink" and
real lemon is used in "Finger Bowl